:
Breaking News

राज्यसभा में भावुक विदाई: बिहार समेत देशभर के 37 सांसदों का कार्यकाल समाप्त

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

नई दिल्ली: बुधवार को राज्यसभा में एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के कुल 37 सांसदों को उनके कार्यकाल पूरा होने पर भावपूर्ण विदाई दी गई। इस अवसर पर बिहार के पांच सांसद भी शामिल रहे, जिनमें अमेंद्र धारी सिंह, प्रेम चंद गुप्ता, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और हरिवंश नारायण सिंह शामिल थे। विदाई सत्र के दौरान सदन में उनके योगदान और सक्रिय भूमिका की जमकर सराहना की गई।
बिहार के सांसदों की विदाई:
बिहार के सांसदों में विशेष रूप से हरिवंश नारायण सिंह की विदाई के दौरान सदन का माहौल बेहद भावुक रहा। जदयू के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा उपसभापति रह चुके हरिवंश ने सदन में वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके 12 वर्षों के कार्यकाल की प्रशंसा की, वहीं विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी उन्हें प्रेरक संबोधन के माध्यम से सम्मानित किया।
राज्यसभा में वर्तमान समय में हुए चुनावों के बाद स्थिति और स्पष्ट हुई है। बिहार की पांच सीटों के लिए हुए हालिया चुनाव में भाजपा से नितिन नवीन और शिवेश राम, जदयू से नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर तथा रालोमो से उपेंद्र कुशवाहा को निर्वाचित किया गया। ऐसे में रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा पुनः राज्यसभा में प्रवेश कर रहे हैं, जबकि अमेंद्र धारी सिंह, प्रेम चंद गुप्ता और हरिवंश नारायण सिंह अब राज्यसभा में वापस नहीं जाएंगे।
देशभर के सांसदों का समग्र योगदान:
विदाई प्राप्त अन्य सांसदों में महाराष्ट्र से शरदचंद्र गोविंदराव पवार, प्रियंका विक्रम चतुर्वेदी, फौजिया तहसीन अहमद खान, भगवत किशनराव कराड और रामदास अठावले शामिल थे। तमिलनाडु से टी.आर. बालू, एम. शंभिदुरई और तिरुचि शिवा रिटायर हुए। पश्चिम बंगाल से साकेत गोखले और मौसम नूर सहित कई वरिष्ठ नेता विदाई प्राप्त हुए।
इसके अलावा ओडिशा से ममता मोहंता, मुजीबुल्ला खान, असम से अजीत कुमार भुयान और भुवनेश्वर कलिता, हरियाणा से किरण चौधरी तथा तेलंगाना से के.आर. सुरेश रेड्डी और अभिषेक मनु सिंघवी का कार्यकाल भी पूरा हुआ। छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश के सांसदों ने भी राज्यसभा में लंबा और प्रभावशाली कार्यकाल निभाया।
संसद में इन सभी नेताओं के योगदान ने न केवल अपने राज्यों के हितों को मजबूती दी, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों को उच्च सदन में आवाज़ दी। विदाई समारोह के साथ ही नए सदस्यों के आने का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिससे राज्यसभा में नई राजनीतिक समीकरण और गठबंधन की दिशा पर भी असर देखने को मिल सकता है।
इस अवसर पर नेताओं ने अपने अनुभव साझा किए, नए सदस्यों को मार्गदर्शन दिया और लोकतंत्र में सांसदों की भूमिका की महत्ता पर जोर दिया। राज्यसभा की इस विदाई ने यह भी संकेत दिया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में निरंतरता और अनुभव का महत्व कितना गहरा होता है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *